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	<title>Comments for Adil Mansuri Urdu*Hindi</title>
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	<description>Urdu poetry in Arabic,Hindi  script</description>
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		<title>Comment on आवाज की दीवार_ आदिल मन्सूरी by RAZIA</title>
		<link>http://adilmansuri.wordpress.com/2008/03/26/avaazkideevar_adil/#comment-4</link>
		<dc:creator>RAZIA</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Apr 2008 10:22:57 +0000</pubDate>
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		<description>वाह!सुबहानअल्लाह!
सन्नाटे का आलम बहोत खूब पेश किया है.

रज़िया मिर्ज़ा</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह!सुबहानअल्लाह!<br />
सन्नाटे का आलम बहोत खूब पेश किया है.</p>
<p>रज़िया मिर्ज़ा</p>
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		<title>Comment on ADIL MANSURI by razia786</title>
		<link>http://adilmansuri.wordpress.com/adil-mansuri/#comment-3</link>
		<dc:creator>razia786</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Apr 2008 13:40:00 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://adilmansuri.wordpress.com/38/#comment-3</guid>
		<description>જનાબ આદિલ મનસુરી સાહેબ.

અસ્સલામાલૈકુમ,

નાનપણ માં “મળે ન મળે” કદાચ પ્રથમ કવિતા હતી જે મારા માં

સંવેદનાઓ જગાડી ગઈ.ત્યાર થી હું પણ એક “કવીયત્રિ બની ગઈ. 

ઘણા વષો સુધી આપનું સરનામું શોધતી હતી અને આજે આપને 

શોધી ને ઘણો આનંદ થયો.હું રઝિયા “રાઝ” તખલ્લુસ” થી લખું છું.

મારી આજ થી 30 વર્ષો ની ઈચ્છા છે કે મળે ન મળે મારા અવાજ 

માં અને મારા જ કંપોઝિશન માં ગાઉં.મારા “ક્ષિતિજ” માં થી એક 

કવિતા આપને મોકલાવી રહી છું આશા છે જરુર ગમશે.

ખુદા હાફિઝ.

રઝિયા અકબર મિર્ઝા.

मेरे वतन 

मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ।
अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां। 

गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,
सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम।
मेरे वतन……… 

हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी,
एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी।
मेरे वतन………. 

यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है,
गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है।
मेरे वतन……….. 

त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,
रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है।
मेरे वतन………. 

गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा,
नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।
मेरे वतन………… 

ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की’
जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की।
मेरे वतन…………. 

कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन,
नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन।
मेरे वतन………</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>જનાબ આદિલ મનસુરી સાહેબ.</p>
<p>અસ્સલામાલૈકુમ,</p>
<p>નાનપણ માં “મળે ન મળે” કદાચ પ્રથમ કવિતા હતી જે મારા માં</p>
<p>સંવેદનાઓ જગાડી ગઈ.ત્યાર થી હું પણ એક “કવીયત્રિ બની ગઈ. </p>
<p>ઘણા વષો સુધી આપનું સરનામું શોધતી હતી અને આજે આપને </p>
<p>શોધી ને ઘણો આનંદ થયો.હું રઝિયા “રાઝ” તખલ્લુસ” થી લખું છું.</p>
<p>મારી આજ થી 30 વર્ષો ની ઈચ્છા છે કે મળે ન મળે મારા અવાજ </p>
<p>માં અને મારા જ કંપોઝિશન માં ગાઉં.મારા “ક્ષિતિજ” માં થી એક </p>
<p>કવિતા આપને મોકલાવી રહી છું આશા છે જરુર ગમશે.</p>
<p>ખુદા હાફિઝ.</p>
<p>રઝિયા અકબર મિર્ઝા.</p>
<p>मेरे वतन </p>
<p>मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ।<br />
अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां। </p>
<p>गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,<br />
सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम।<br />
मेरे वतन……… </p>
<p>हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी,<br />
एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी।<br />
मेरे वतन………. </p>
<p>यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है,<br />
गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है।<br />
मेरे वतन……….. </p>
<p>त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,<br />
रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है।<br />
मेरे वतन………. </p>
<p>गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा,<br />
नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।<br />
मेरे वतन………… </p>
<p>ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की’<br />
जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की।<br />
मेरे वतन…………. </p>
<p>कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन,<br />
नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन।<br />
मेरे वतन………</p>
]]></content:encoded>
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		<title>Comment on ADIL MANSURI by RAZIA</title>
		<link>http://adilmansuri.wordpress.com/adil-mansuri/#comment-2</link>
		<dc:creator>RAZIA</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Apr 2008 14:35:42 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://adilmansuri.wordpress.com/38/#comment-2</guid>
		<description>જનાબ આદિલ મનસુરી સાહેબ.

અસ્સલામાલૈકુમ,

નાનપણ માં &quot;મળે ન મળે&quot; કદાચ પ્રથમ કવિતા હતી જે મારા માં

સંવેદનાઓ જગાડી ગઈ.ત્યાર થી હું પણ એક &quot;કવીયત્રિ બની ગઈ. 

 ઘણા વષો સુધી આપનું સરનામું શોધતી હતી અને આજે આપને 

શોધી ને ઘણો આનંદ થયો.હું રઝિયા &quot;રાઝ&quot; તખલ્લુસ&quot; થી લખું છું.

મારી આજ થી 30 વર્ષો ની ઈચ્છા છે કે મળે ન મળે મારા અવાજ 

માં અને મારા જ કંપોઝિશન માં ગાઉં.મારા &quot;ક્ષિતિજ&quot; માં થી એક 

કવિતા આપને મોકલાવી રહી છું આશા છે જરુર ગમશે.

ખુદા હાફિઝ.

રઝિયા અકબર મિર્ઝા.

                           मेरे वतन 


मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ। 
अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां। 

गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,
 सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम। 
मेरे वतन......... 

हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी, 
एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी। 
मेरे वतन.......... 

यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है, 
गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है। 
मेरे वतन........... 

त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,
 रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है। 
मेरे वतन.......... 

गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा, 
नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।
 मेरे वतन............ 

ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की’ 
जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की। 
मेरे वतन............. 

कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन, 
नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन। 
मेरे वतन.........</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>જનાબ આદિલ મનસુરી સાહેબ.</p>
<p>અસ્સલામાલૈકુમ,</p>
<p>નાનપણ માં &#8220;મળે ન મળે&#8221; કદાચ પ્રથમ કવિતા હતી જે મારા માં</p>
<p>સંવેદનાઓ જગાડી ગઈ.ત્યાર થી હું પણ એક &#8220;કવીયત્રિ બની ગઈ. </p>
<p> ઘણા વષો સુધી આપનું સરનામું શોધતી હતી અને આજે આપને </p>
<p>શોધી ને ઘણો આનંદ થયો.હું રઝિયા &#8220;રાઝ&#8221; તખલ્લુસ&#8221; થી લખું છું.</p>
<p>મારી આજ થી 30 વર્ષો ની ઈચ્છા છે કે મળે ન મળે મારા અવાજ </p>
<p>માં અને મારા જ કંપોઝિશન માં ગાઉં.મારા &#8220;ક્ષિતિજ&#8221; માં થી એક </p>
<p>કવિતા આપને મોકલાવી રહી છું આશા છે જરુર ગમશે.</p>
<p>ખુદા હાફિઝ.</p>
<p>રઝિયા અકબર મિર્ઝા.</p>
<p>                           मेरे वतन </p>
<p>मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ।<br />
अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां। </p>
<p>गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,<br />
 सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230; </p>
<p>हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी,<br />
एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;. </p>
<p>यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है,<br />
गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;.. </p>
<p>त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,<br />
 रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;. </p>
<p>गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा,<br />
नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।<br />
 मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; </p>
<p>ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की’<br />
जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;. </p>
<p>कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन,<br />
नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन।<br />
मेरे वतन&#8230;&#8230;&#8230;</p>
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