दिल्ही में उर्दू के मुम्ताज जदीद शायर आदिल मन्सूरी के एजाज में नशीश्त_‘ध इन्किलाब‘ मुम्बइ
उर्दू की नइ बस्तीयोंमें भी नइ नसल उर्दूसे बेगाना हैः डोकटर शेहपर रसूल
आदिल मन्सूरी एक तवील अर्से से अमरीकामें मुकीम है.गुजिश्ता दिनों गुजरातकी हकुमतने उन्हें ‘वली गुजराती‘ एवॉर्ड से सरफरज किया था.इसी सिसिलेमें वो हिन्दोस्तां के दौरे पर हैं.
उन्होंने दिल्ही में भी एक दिन कयाम किया.इस नशीश्तमें हिन्दुस्तानी शायरी के अमुमी मैलानात और मोजुदा रुहजान पर गुफ्तगु हुइ.
आदिल मन्सूरी चुं कि उर्दू के अलावा गुजराती जबान के भी शायर है,इस लिये न्होने गुजराती अदब के मौजुदा मन्झरनामे पर भी गुफ्तगु की.और कहा कि गुजराती में जो गझ्लें कही जा रही है उनमें नए मजामीनकी तलाश पर ज्यादा जोर है.गुजराती जबानके मुशायरों में शायरी की वही हैयत मकबूल है, जीसे हम उर्दू वाले गझ्ल कहेते हैं.
जुबेर रजवीने कहा कि आज कल मरुजा सारफी कल्चर एक तरह से जबानो तेहजीब की नफी करने वाला है.
डोकटर शहीर रसुल ने कहा कि इन दिनों उर्दूकी नई बस्तियों का बहुत शोर है,लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना चाहिये वहां परवान चढने वाली नई नसल उर्दूसे बेगाना है.
नशिश्त के मेजबान डॉकटर अहमद महफूजने कहा कि ये बात बहर हाल खूश आइन्द है कि हमने इस मोके को गनीमत जान कर न सिर्फ ये कि आदिल मन्सूरीसे उनका कलाम सुना,बल्कि उर्दू के अलावा बाज दीगर जबानों की शायरी पर गुफ्तगु भी हुइ.उन्होने कहा कि गुजिस्ता चार दहाइओंसे आदिल मन्सूरि जदिदयतके निहायत मोअतबर और नुमाइन्दह शायर और फनकार के तौर पर दुनियामें मअरुफ और मकबूल है.
जनाब खालिद बीन सुहैलने कहा कि आदिल मन्सूरी की शायरीकी दुनियामे जो हेसियत है,वो तो मुसल्लम है ही, मगर मे उन्हें एक बहुत अच्छे आर्टीस्ट के तौर पर भी जानताहुं.हेरतकी बात है कि दोनो काम एक साथ निहायत उमदगीसे साथ आदिल साहब केसे अन्जाम देते हैं.
नशीश्तमें दिल्ही के मुमताज अहले अदब और दीगर मोअज्जजीननें भी शिर्कत की.
(रीपोर्टः उमैर मन्जुर ,दिल्ही)
ऊर्दू अखबार ‘ध इन्किलाब‘मुम्बइ के सौजनयसे)
With Courtesy of ‘The Inquilab’ Urdu Mumbai 1st July2008





















